Best Family Doctor in Tohana Dr. Neeraj Gupta

डायबिटीज के मरीजों में हार्ट डिज़ीज़ का खतरा ज्यादा क्यों होता है?

टोहाना में डायबिटीज ट्रीटमेंट

भारत में डायबिटीज बहुत तेज़ी से बढ़ रही है, और इसके साथ सबसे बड़ी चिंता यह है कि डायबिटीज हार्ट को गहराई से प्रभावित करती है। यही कारण है कि डायबिटीज से पीड़ित लोगों में हार्ट अटैक, स्ट्रोक और ब्लड सर्कुलेशन से जुड़ी समस्याएं अधिक देखी जाती हैं। इस ब्लॉग में हम समझेंगे कि डायबिटीज हार्ट डिजीज का खतरा क्यों बढ़ाता है, और कैसे सही देखभाल और उपचार, जैसे टोहाना में डायबिटीज ट्रीटमेंट और गणपति अस्पताल जैसी विशेषज्ञ सेवाएं, मरीजों की सेहत को सुरक्षित रख सकती हैं।

1. हाई ब्लड शुगर धमनियों को नुकसान पहुंचाता है

जब ब्लड शुगर लंबे समय तक बढ़ा रहता है, तो यह धीरे-धीरे खून की धमनियों की अंदरूनी परत को नुकसान पहुंचाता है। इस वजह से धमनियां सख्त होने लगती हैं और उनमें ब्लॉकेज बनने लगता है। यही ब्लॉकेज हार्ट अटैक या स्ट्रोक का मुख्य कारण बनता है।
इसीलिए डॉक्टर नियमित जांच और सही इलाज जैसे टोहाना में डायबिटीज ट्रीटमेंट और गणपति अस्पताल में उपलब्ध डायबिटीज विशेषज्ञ देखभाल की सलाह देते हैं।

2. डायबिटीज कोलेस्ट्रॉल असंतुलित करती है

डायबिटीज के साथ शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) बढ़ जाता है और अच्छा कोलेस्ट्रॉल (HDL) कम हो जाता है। LDL बढ़ने से दिल की नसों में जमा होने की प्रक्रिया तेज हो जाती है।
यदि मरीज समय रहते सही इलाज लें, जैसे टोहाना में डायबिटीज ट्रीटमेंट या गणपति अस्पताल की हार्ट और डायबिटीज दोनों से जुड़ी सेवाएं, तो कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण में रखने में मदद मिलती है।

3. ब्लड प्रेशर बढ़ने की संभावना

डायबिटीज के मरीजों में हाई ब्लड प्रेशर का खतरा भी ज्यादा होता है। हाई BP दिल पर दबाव बढ़ाता है और धमनियों को कमजोर करता है। दोनों बीमारियों का संयोजन हार्ट अटैक के खतरे को कई गुना बढ़ा देता है।
इसी कारण डायबिटीज मरीजों के लिए समय पर जांच व उपचार जैसे टोहाना में डायबिटीज ट्रीटमेंट और गणपति अस्पताल की कार्डियोलॉजी सेवाएं बेहद जरूरी हैं।

 

4. इंसुलिन रेजिस्टेंस और सूजन

डायबिटीज का एक बड़ा कारण है इंसुलिन रेजिस्टेंस। जब शरीर इंसुलिन को सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाता, तो शरीर में सूजन की प्रक्रिया बढ़ जाती है। यह सूजन दिल की नसों के लिए हानिकारक होती है और हार्ट डिजीज की संभावना को और तेज करती है।
इस स्थिति में मरीजों को अपनी लाइफस्टाइल सुधारने और उचित देखभाल के लिए टोहाना में डायबिटीज ट्रीटमेंट और गणपति अस्पताल की हेल्थ मैनेजमेंट गाइडेंस की जरूरत होती है।

5. न्यूरोपैथी हार्ट के सिग्नल कमजोर करती है

लंबे समय तक डायबिटीज रहने पर नर्व डैमेज या न्यूरोपैथी भी हो सकती है। यह हार्ट की धड़कन को नियंत्रित करने वाले तंत्र को प्रभावित कर सकती है। कई बार ऐसे मरीजों में माइल्ड हार्ट अटैक का पता भी नहीं चलता।
समय पर इलाज और नियमित चेकअप, जैसे टोहाना में डायबिटीज ट्रीटमेंट और गणपति अस्पताल में उपलब्ध हार्ट मॉनिटरिंग सुविधाएं, हार्ट हेल्थ को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

डायबिटीज मरीज कैसे कम कर सकते हैं हार्ट डिज़ीज़ का खतरा?
  1. ब्लड शुगर को नियमित रूप से मॉनिटर करें
    लगातार हाई शुगर हार्ट पर सीधा असर डालती है, इसलिए इसे नियंत्रण में रखना सबसे जरूरी कदम है।

  2. नियमित हार्ट स्क्रीनिंग करवाएं
    खासकर यदि आपको लंबे समय से डायबिटीज है, तो ECG, लिपिड प्रोफाइल और BP चेकअप करवाना आवश्यक है।

  3. हेल्दी डाइट और लाइफस्टाइल अपनाएं
    फाइबर युक्त भोजन, कम तेल, कम नमक और रोज़ाना 30 मिनट की वॉक हार्ट को मजबूत बनाती है।

  4. डॉक्टर द्वारा बताए गए इलाज का पालन करें
    दवा, आहार और जांच को कभी अनदेखा न करें। विशेषज्ञ देखभाल-जैसे टोहाना के गणपति अस्पताल में उपलब्ध डायबिटीज ट्रीटमेंट-हार्ट और डायबिटीज दोनों को प्रबंधित करने में मदद करता है।
निष्कर्ष

डायबिटीज सिर्फ ब्लड शुगर की बीमारी नहीं बल्कि पूरी रक्त वाहिका प्रणाली को प्रभावित करने वाली जटिल स्थिति है। यही कारण है कि डायबिटीज के मरीजों में हार्ट डिजीज का खतरा ज्यादा होता है। समय पर निदान, नियमित चेकअप और सही चिकित्सा जैसे टोहाना में डायबिटीज ट्रीटमेंट और गणपति अस्पताल की विश्वसनीय सेवाएं अपनाने से मरीज हार्ट संबंधी जोखिम को काफी हद तक कम कर सकते हैं।
सही जानकारी, समय पर उपचार और विशेषज्ञ देखभाल से जीवन सुरक्षित और स्वस्थ रह सकता है।

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