Best Family Doctor in Tohana Dr. Neeraj Gupta

मोबाइल और स्क्रीन टाइम का दिमाग पर प्रभाव

मोबाइल और स्क्रीन टाइम का दिमाग पर प्रभाव

आज के समय में मोबाइल, लैपटॉप और अन्य डिजिटल डिवाइस हमारे जीवन का अहम हिस्सा बन चुके हैं। पढ़ाई, काम, मनोरंजन और सोशल मीडिया—हर गतिविधि स्क्रीन से जुड़ गई है। लेकिन इस डिजिटल सुविधा के साथ एक गंभीर सवाल भी खड़ा हो गया है: मोबाइल और स्क्रीन टाइम का दिमाग पर प्रभाव आखिर कितना गहरा है?

बहुत से लोग इसे सामान्य आदत मान लेते हैं, जबकि लगातार और अत्यधिक स्क्रीन टाइम दिमाग की कार्यक्षमता को धीरे-धीरे नुकसान पहुँचा सकता है।

बढ़ता स्क्रीन टाइम: एक नई स्वास्थ्य समस्या

सुबह उठते ही मोबाइल देखना और रात को सोने से पहले स्क्रीन स्क्रॉल करना आज आम बात हो गई है। यह लगातार बढ़ता स्क्रीन टाइम दिमाग को आराम करने का मौका नहीं देता।
जब दिमाग लंबे समय तक एक्टिव रहता है, तो मानसिक थकान बढ़ती है और फोकस कम होने लगता है। यही वजह है कि मोबाइल और स्क्रीन टाइम का दिमाग पर प्रभाव आज हर उम्र के लोगों में देखने को मिल रहा है।

दिमाग की एकाग्रता पर असर

लगातार नोटिफिकेशन, मैसेज और वीडियो देखने से दिमाग एक समय पर एक काम पर ध्यान नहीं लगा पाता।
इससे

  • ध्यान भटकता है
  • याददाश्त कमजोर होती है
  • निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होती है

     

यही कारण है कि आज बहुत से लोग छोटी छोटी बातें भूलने की शिकायत करते हैं। यह साफ संकेत है कि मोबाइल और स्क्रीन टाइम का दिमाग पर प्रभाव हमारी सोचने की शक्ति को प्रभावित कर रहा है।

तनाव और मानसिक थकान

स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी (Blue Light) दिमाग को लगातार सतर्क बनाए रखती है। इससे दिमाग को आराम नहीं मिलता और तनाव बढ़ता है।
लंबे समय तक तनाव में रहने से चिड़चिड़ापन, बेचैनी और मानसिक थकावट महसूस होने लगती है।

अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो यही तनाव आगे चलकर एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी समस्याओं का रूप ले सकता है।

नींद की गुणवत्ता पर प्रभाव

अच्छी नींद दिमाग के लिए बहुत जरूरी होती है। लेकिन सोने से पहले मोबाइल या टीवी देखने से नींद से जुड़ा हार्मोन मेलाटोनिन प्रभावित होता है।
इसका परिणाम होता है-

  • देर से नींद आना
  • बार-बार नींद टूटना
  • सुबह थकान महसूस होना

नींद पूरी न होने से दिमाग की कार्यक्षमता कम हो जाती है। इसलिए विशेषज्ञ मानते हैं कि मोबाइल और स्क्रीन टाइम का दिमाग पर प्रभाव नींद से सीधा जुड़ा हुआ है।

सिरदर्द और ब्रेन प्रेशर

लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखों और दिमाग पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इससे—

  • बार-बार सिरदर्द
  • माइग्रेन
  • चक्कर आना

जैसी समस्याएँ हो सकती हैं। कई लोग इन्हें सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि ये दिमाग से जुड़ी चेतावनी हो सकती हैं।

बच्चों और युवाओं पर ज्यादा खतरा

बच्चों और युवाओं का दिमाग विकास की अवस्था में होता है। ज्यादा स्क्रीन टाइम से—

  • सीखने की क्षमता प्रभावित होती है
  • व्यवहार में चिड़चिड़ापन आता है
  • पढ़ाई में मन नहीं लगता

इस उम्र में मोबाइल और स्क्रीन टाइम का दिमाग पर प्रभाव लंबे समय तक रहने वाला हो सकता है, इसलिए समय रहते नियंत्रण जरूरी है।

लंबे समय तक स्क्रीन टाइम के गंभीर परिणाम

लगातार और अनियंत्रित स्क्रीन टाइम से आगे चलकर

  • ब्रेन फॉग (सोचने में धुंधलापन)
  • नसों में झनझनाहट
  • याददाश्त कमजोर होना
  • निर्णय लेने में परेशानी

जैसी समस्याएँ हो सकती हैं। ये सभी संकेत बताते हैं कि दिमाग पर दबाव बढ़ रहा है।

दिमाग को सुरक्षित रखने के आसान उपाय

दिमाग को स्वस्थ रखने के लिए कुछ सरल आदतें अपनाई जा सकती हैं:

  • हर 30–40 मिनट में स्क्रीन से ब्रेक लें
  • सोने से कम से कम 1 घंटा पहले मोबाइल बंद करें
  • रोज़ाना योग और हल्की एक्सरसाइज़ करें
  • 7–8 घंटे की पूरी नींद लें

ये छोटे कदम मोबाइल और स्क्रीन टाइम का दिमाग पर प्रभाव कम करने में मदद कर सकते हैं।

कब डॉक्टर से संपर्क करें?

अगर आपको लगातार-

  • सिरदर्द
  • चक्कर
  • याददाश्त में कमी
  • अत्यधिक मानसिक थकान
  • हाथ-पैरों में झनझनाहट

जैसी समस्याएँ हो रही हैं, तो इसे नजरअंदाज न करें।

Ganpati Healthcare – ब्रेन व नर्व स्वास्थ्य विभाग में दिमाग और नसों से जुड़ी समस्याओं की सही जांच और मार्गदर्शन उपलब्ध है।

निष्कर्ष

डिजिटल दुनिया से पूरी तरह दूर रहना संभव नहीं है, लेकिन संतुलन बनाना हमारे हाथ में है। अब जब आप समझ चुके हैं कि मोबाइल और स्क्रीन टाइम का दिमाग पर प्रभाव कितना गंभीर हो सकता है, तो समय आ गया है कि स्क्रीन उपयोग को सीमित करें और अपनी ब्रेन हेल्थ को प्राथमिकता दें।

Share the Post:

Related Posts

Book Consultation

Contact Form Demo